फाइलों में कैद दिव्यांग की उम्मीदें:जांजगीर-चांपा में शिविर रद्द,90% दिव्यांग को आज तक नहीं मिली ट्राइसाइकिल।
22/05/2026 5:34 PM Total Views: 30285

SUHANA LIVE NEWS शासन भले ही दिव्यांगजनों के उत्थान और सहायता के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो,लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जिले में दिव्यांगजनों के लिए आयोजित होने वाला सहायक उपकरण वितरण शिविर बिना सूचना स्थगित कर दिया गया,जबकि दूसरी ओर 90 प्रतिशत दिव्यांग युवक वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल के लिए अधिकारियों और जनदर्शन के चक्कर काटने को मजबूर है। हैरानी की बात यह है कि नेता प्रतिपक्ष की सिफारिश के बाद भी प्रशासन अब तक मौन बना हुआ है।

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जानकारी के मुताबिक,विकासखंड बम्हनीडीह में 30 अप्रैल को दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण वितरण एवं मूल्यांकन शिविर आयोजित किया जाना था। लेकिन शिविर को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक स्थगित कर दिया गया। इसका खामियाजा उन दिव्यांगजनों को भुगतना पड़ा, जो दूर-दराज गांवों से भारी परेशानी उठाकर शिविर स्थल पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि करीब 10 से 12 दिव्यांगजन घंटों तक शिविर स्थल पर भटकते रहे। किसी अधिकारी ने न तो उन्हें जानकारी देना उचित समझा और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। आर्थिक तंगी और शारीरिक पीड़ा झेल रहे इन लोगों के लिए यह केवल असुविधा नहीं,बल्कि संवेदनहीन प्रशासनिक व्यवस्था का दर्दनाक उदाहरण बन गया।

इसी बीच ग्राम पोड़ीकला निवासी राजेश कुमार कश्यप की पीड़ा ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। लगभग 90 प्रतिशत दिव्यांग राजेश कुमार पिछले लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल की मांग कर रहे हैं,लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही।
दस्तावेजों के अनुसार,राजेश कुमार ने 28 नवंबर 2024 को जनसमस्या निवारण शिविर सरहर में आवेदन दिया था। इसके बाद 2 फरवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन,जांजगीर चांपा में भी उन्होंने आवेदन प्रस्तुत किया। लेकिन महीनों गुजर जाने के बाद भी उन्हें नई ट्राइसाइकिल उपलब्ध नहीं कराई गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधान सभा अध्यक्ष डा.चरण दास महंत ने भी 10 मार्च 2026 को कलेक्टर को पत्र लिखकर राजेश कुमार को तत्काल इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि राजेश कुमार की पुरानी ट्राइसाइकिल पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और वह उपयोग के लायक नहीं बची है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक दिव्यांग व्यक्ति को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए वर्षों तक आवेदन,जनदर्शन और नेताओं की सिफारिशों का सहारा लेना पड़े,तब शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राजेश कुमार को इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाए और बिना सूचना शिविर स्थगित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं —
क्या जिम्मेदार अधिकारी दिव्यांगजनों की पीड़ा समझेंगे,या फिर उनकी उम्मीदें हमेशा की तरह सरकारी फाइलों में ही दम तोड़ती रहेंगी?
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SUKHSAGAR MATHUR
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फाइलों में कैद दिव्यांग की उम्मीदें:जांजगीर-चांपा में शिविर रद्द,90% दिव्यांग को आज तक नहीं मिली ट्राइसाइकिल।
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