चांपा का स्ट्रीट.लाइटें और जानलेवा खामोशी.? :चांपा का अंधेरा रेल्वे ओवरब्रिज.।।
14/06/20258:04 PMTotal Views: 24965
चांपा का अंधेरा रेल्वे ओवरब्रिज: बंद स्ट्रीट लाइटें और जानलेवा खामोशी:..? छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा जिला अपनी खनिज सम्पदा और कृषि क्षमता के साथ कोसा कांसा कंचन की नगरी के लिए जाना जाता है,लेकिन पिछले कई वर्षों से यहां के चांपा स्थित एक विशिष्ट ओवरब्रिज की कहानी सुर्खियों में बनी हुई है। यह ओवरब्रिज,जिसका निर्माण स्वयं विवादों के घेरे में रहा,अब एकबार फिर से नए और गंभीर संकट का केंद्र बनता जा रहा है,क्योकि सालों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाईटें की अंधेरा,सिर्फ राहगीरों के लिए खतरा नही है,बल्कि हर मुसाफ़िर जो इस ब्रिज से आवागमन करते हैं।उनकी आखरी सफर हो सकता है क्योंकि इन्ही में से,कइयों की जानें जा चुकी हैं और अनेक परिवार शोक के सागर में डूब गए हैं।बंद पड़े स्ट्रीट लाइट को शीघ्र अतिशीघ्र रौशन किया जाए,यदि रौशनी की सागर जल जाता है तो,ओवरब्रिज पर जलती हुई रोशनी केवल रास्ता ही नहीं दिखाएगी,बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता के अंधेरे को चीरने और जनजीवन की सुरक्षा के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बनेगी। जनता की आवाज को अनसुना करना अब बंद होना चाहिए, क्योंकि हर अनसुनी गुहार किसी न किसी की जिंदगी से जुड़ी होती है। अंधेरे में खो चुकी जानों की याद में,आने वाले जीवनों की रक्षा के लिए, अब कार्रवाई का समय आ गया है। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने से यह समस्या जन-असहमति और क्रोध का रूप ले चुकी है।
चांपा रेल्वे ओवरब्रिज का इतिहास स्वच्छ नहीं रहा। इसके निर्माण को लेकर शुरू से ही गंभीर आरोप और विवाद सामने आते रहे। निर्माण कार्य की गुणवत्ता,लागत में अनियमितताएं,और ठेकेदारों एवं अधिकारियों के बीच गलत समझौतों के आरोपों ने इस ढांचे पर सवालिया निशान लगा दिए था। यहां तक कि कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने इसकी जांच की मांग भी उठाई थी।ब्रिज की बुनियादी सुविधाओं,को लेकर नगर के लोगो ने बैगर राजनीतिक दल के हमर चांपा के बैनर तले रेल्वे स्टेशन में धरना प्रदर्शन कर ठेकेदार और रेल्वे प्रशासन की उदासीनता को लेकर रेल्वे परिसर में नगाड़ा बजाकर कुंभकर्णीय नींद में सोए हुए जिम्मेदार आला अधिकारियों को जगाने की काम की थी। तब जाकर ब्रिज निर्माण कार्य में तेजी आई थी।लेकिन,स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम,की उपेक्षा हुई। निर्माण के बाद से ही या फिर बहुत कम समय बाद ही ये लाइटें खराब हो गईं और फिर कभी ठीक नहीं की गईं। =अंधेरे का काला साया: जानलेवा परिणाम।=
ओवरब्रिज पर स्ट्रीट लाइटों का बंद रहना कोई छोटी सी असुविधा नहीं है; यह एक गंभीर जनसुरक्षा संकट है बना हुआ है।रात्रिकालीन पूर्ण अंधकार में वायआकार की ओवरब्रिज खतरनाक मोड़ सा लगता है। जो वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए एक मौत का फंदा बन गया है:
दुर्घटनाओं का दुखद सिलसिला:स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण दृश्यता शून्य हो जाती है। वाहनों के बीच टक्कर,वाहनों का ओवरब्रिज की दीवारों से टकराना,या गलत दिशा में मुड़ जाने जैसी घटनाएं होने से इनकार नहीं किया जा सकता हैं। स्थानीय निवासी और एम्बुलेंस चालक कई घातक और गंभीर चोटों वाली दुर्घटनाओं तथा अकारण मृत्यु की पुष्टि करते हैं,जो सीधे तौर पर इस अंधेरे से जुड़ी हैं।
निर्दोष लोगो की जान चले जाना सबसे दर्दनाक पहलू है कि इस उपेक्षा की कीमत मासूम लोगों की जान से चुकाई जा रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इस ओवरब्रिज पर अंधेरे के कारण हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की अकारण मौत हो चुकी है। हर एक मौत एक परिवार को तोड़ देती है जो प्रशासनिक लापरवाही पर एक काला धब्बा है।
=.पैदल यात्रियों के लिए जोखिम,ओवरब्रिज का इस्तेमाल पैदल यात्री भी करते हैं। बिना रोशनी के,फुटपाथ का पता लगाना मुश्किल होता है,और वाहनों से टकराने या गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए तो यह रास्ता विशेष रूप से भयावह है=
स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इस जानलेवा समस्या के प्रति सजग हैं और लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने इस खतरनाक स्थिति की जानकारी हर संभव स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया है:
प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायतें: तहसीलदार,कलेक्टर कार्यालय और पुलिस प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गई हैं, जिनमें दुर्घटनाओं के विवरण और तत्काल कार्रवाई की मांग शामिल है।जनप्रतिनिधियों से गुहार: स्थानीय पार्षदों,विधायकों और सांसदों के कार्यालयों तक यह मुद्दा पहुंचाया गया है। जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे गए हैं और उनके सामने सीधे मांग रखी गई है।
*धरने-प्रदर्शन: हताश नागरिकों ने कई बार ओवरब्रिज के पास या प्रशासनिक कार्यालयों के सामने शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन भी किए हैं।
लेकिन इन सभी प्रयासों का परिणाम शून्य रहा है। प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों की तरफ से पूर्ण उदासीनता और खामोशी ही दिखाई देती है। शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई,न ही लाइटों की मरम्मत का काम शुरू हुआ है। यह लगातार अनदेखी एक स्पष्ट संदेश देती है कि आम जनता की सुरक्षा और जीवन उनकी प्राथमिकता सूची में नहीं हैं।
*क्यों जारी है यह खामोशी जांच की जरूरत.?**
यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर एक इतनी स्पष्ट और जानलेवा समस्या को दूर करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? कुछ संभावित कारणों पर विचार किया जा सकता है।
All India state chief===== sukhsagar.mathur
==News suhanalivenews.com===
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चांपा का स्ट्रीट.लाइटें और जानलेवा खामोशी.? :चांपा का अंधेरा रेल्वे ओवरब्रिज.।।
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चांपा का अंधेरा रेल्वे ओवरब्रिज: बंद स्ट्रीट लाइटें और जानलेवा खामोशी:..?
छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा जिला अपनी खनिज सम्पदा और कृषि क्षमता के साथ कोसा कांसा कंचन की नगरी के लिए जाना जाता है,लेकिन पिछले कई वर्षों से यहां के चांपा
स्थित एक विशिष्ट ओवरब्रिज की कहानी सुर्खियों में बनी हुई है। यह ओवरब्रिज,जिसका निर्माण स्वयं विवादों के घेरे में रहा,अब एकबार फिर से नए और गंभीर संकट का
केंद्र बनता जा रहा है,क्योकि सालों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाईटें की अंधेरा,सिर्फ राहगीरों के लिए खतरा नही है,बल्कि हर मुसाफ़िर जो इस ब्रिज से आवागमन करते
हैं।उनकी आखरी सफर हो सकता है क्योंकि इन्ही में से,कइयों की जानें जा चुकी हैं और अनेक परिवार शोक के सागर में डूब गए हैं।बंद पड़े स्ट्रीट लाइट को शीघ्र
अतिशीघ्र रौशन किया जाए,यदि रौशनी की सागर जल जाता है तो,ओवरब्रिज पर जलती हुई रोशनी केवल रास्ता ही नहीं दिखाएगी,बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता के अंधेरे को
चीरने और जनजीवन की सुरक्षा के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बनेगी। जनता की आवाज को अनसुना करना अब बंद होना चाहिए, क्योंकि हर अनसुनी गुहार किसी
न किसी की जिंदगी से जुड़ी होती है। अंधेरे में खो चुकी जानों की याद में,आने वाले जीवनों की रक्षा के लिए, अब कार्रवाई का समय आ गया है। स्थानीय प्रशासन और
जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने से यह समस्या जन-असहमति और क्रोध का रूप ले चुकी है।
विवादों से शुरुआत: एक संदिग्ध नींव*
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चांपा रेल्वे ओवरब्रिज का इतिहास स्वच्छ नहीं रहा। इसके निर्माण को लेकर शुरू से ही गंभीर आरोप और विवाद सामने आते रहे। निर्माण कार्य की गुणवत्ता,लागत में
अनियमितताएं,और ठेकेदारों एवं अधिकारियों के बीच गलत समझौतों के आरोपों ने इस ढांचे पर सवालिया निशान लगा दिए था। यहां तक कि कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक
संगठनों ने इसकी जांच की मांग भी उठाई थी।ब्रिज की बुनियादी सुविधाओं,को लेकर नगर के लोगो ने बैगर राजनीतिक दल के हमर चांपा के बैनर तले रेल्वे स्टेशन में
धरना प्रदर्शन कर ठेकेदार और रेल्वे प्रशासन की उदासीनता को लेकर रेल्वे परिसर में नगाड़ा बजाकर कुंभकर्णीय नींद में सोए हुए जिम्मेदार आला अधिकारियों को
जगाने की काम की थी। तब जाकर ब्रिज निर्माण कार्य में तेजी आई थी।लेकिन,स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम,की उपेक्षा हुई। निर्माण के बाद से ही या फिर बहुत कम समय बाद ही
ये लाइटें खराब हो गईं और फिर कभी ठीक नहीं की गईं।
=अंधेरे का काला साया: जानलेवा परिणाम।=
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ओवरब्रिज पर स्ट्रीट लाइटों का बंद रहना कोई छोटी सी असुविधा नहीं है; यह एक गंभीर जनसुरक्षा संकट है बना हुआ है।रात्रिकालीन पूर्ण अंधकार में वायआकार की
ओवरब्रिज खतरनाक मोड़ सा लगता है। जो वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए एक मौत का फंदा बन गया है:
दुर्घटनाओं का दुखद सिलसिला:स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण दृश्यता शून्य हो जाती है। वाहनों के बीच टक्कर,वाहनों का ओवरब्रिज की दीवारों से टकराना,या गलत
दिशा में मुड़ जाने जैसी घटनाएं होने से इनकार नहीं किया जा सकता हैं। स्थानीय निवासी और एम्बुलेंस चालक कई घातक और गंभीर चोटों वाली दुर्घटनाओं तथा अकारण
मृत्यु की पुष्टि करते हैं,जो सीधे तौर पर इस अंधेरे से जुड़ी हैं।
निर्दोष लोगो की जान चले जाना सबसे दर्दनाक पहलू है कि इस उपेक्षा की कीमत मासूम लोगों की जान से चुकाई जा रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों
में इस ओवरब्रिज पर अंधेरे के कारण हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की अकारण मौत हो चुकी है। हर एक मौत एक परिवार को तोड़ देती है जो प्रशासनिक लापरवाही पर एक
काला धब्बा है।
=.पैदल यात्रियों के लिए जोखिम,ओवरब्रिज का इस्तेमाल पैदल यात्री भी करते हैं। बिना रोशनी के,फुटपाथ का पता लगाना मुश्किल होता है,और वाहनों से टकराने या
गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए तो यह रास्ता विशेष रूप से भयावह है=
स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इस जानलेवा समस्या के प्रति सजग हैं और लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने इस खतरनाक स्थिति की जानकारी हर संभव स्तर
पर पहुंचाने का प्रयास किया है:
प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायतें: तहसीलदार,कलेक्टर कार्यालय और पुलिस प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गई हैं, जिनमें दुर्घटनाओं के विवरण और
तत्काल कार्रवाई की मांग शामिल है।जनप्रतिनिधियों से गुहार: स्थानीय पार्षदों,विधायकों और सांसदों के कार्यालयों तक यह मुद्दा पहुंचाया गया है।
जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे गए हैं और उनके सामने सीधे मांग रखी गई है।
*धरने-प्रदर्शन: हताश नागरिकों ने कई बार ओवरब्रिज के पास या प्रशासनिक कार्यालयों के सामने शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन भी किए हैं।
लेकिन इन सभी प्रयासों का परिणाम शून्य रहा है। प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों की तरफ से पूर्ण उदासीनता और खामोशी ही दिखाई देती है। शिकायतों पर कोई
ठोस कार्रवाई नहीं हुई,न ही लाइटों की मरम्मत का काम शुरू हुआ है। यह लगातार अनदेखी एक स्पष्ट संदेश देती है कि आम जनता की सुरक्षा और जीवन उनकी प्राथमिकता
सूची में नहीं हैं।
*क्यों जारी है यह खामोशी जांच की जरूरत.?**
यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर एक इतनी स्पष्ट और जानलेवा समस्या को दूर करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? कुछ संभावित कारणों पर विचार किया जा सकता है।
All India state chief===== sukhsagar.mathur
==News suhanalivenews.com===