एसीबी समूह से जुड़े कोयला कारोबार की सीबीआई जांच की मांग,एसईसीएल मुख्यालय के सामने धरना
25/09/202612:59 AMTotal Views: 37653
सुहाना लाइव न्यूज बिलासपुर, 24 सितंबर 2026 भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ ने एसीबी समूह की कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन एवं रेलवे साइडिंग से संबंधित गतिविधियों की वर्ष 1999 से वर्तमान तक जांच की मांग को लेकर गुरुवार को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से जांच संबंधी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
पार्टी के संयोजक एवं अध्यक्ष दीपक दुबे ने आरोप लगाया कि एसीबी समूह से संबंधित कोयला कारोबार में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कोयले की गुणवत्ता,उत्पादन, परिवहन, वाशरी में प्रसंस्करण तथा रिजेक्ट कोल के वास्तविक उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वाशरी की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन का अभिलेखों से सत्यापन होना चाहिए।
संगठन ने एसीबी समूह की दीपका, गेवरा,कुसमुंडा,चकाबुरा,रतिजा, रेंकी और बिंझारी सहित संबंधित वाशरियों एवं ताप विद्युत परियोजनाओं की गतिविधियों की जांच के लिए सीबीआई जांच के साथ उच्चस्तरीय विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है। इसके अलावा वित्तीय एवं डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट, तकनीकी जांच तथा भौतिक सत्यापन कराने की मांग रखी गई।
कोयले के स्रोत और उपयोग का हो सत्यापन दुबे ने मांग की कि कच्चे कोयले से लेकर धुले कोयले, मध्यवर्ती उत्पाद, रिजेक्ट, गाद एवं सूक्ष्म कणों तक का वैज्ञानिक हिसाब तैयार किया जाए। परिवहन किए गए कोयले के स्रोत, वाशरी, प्रसंस्करण, रिजेक्ट की मात्रा, परिवहन मार्ग, प्राप्तकर्ता और अंतिम उपयोग का रिकॉर्ड मिलाया जाए।
उन्होंने पूर्व में एसीबी से संबंधित परिसरों में बड़ी मात्रा में कोयला पकड़े जाने का दावा करते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की। साथ ही कोल लेवी से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की।
दीपका क्षेत्र में प्रदूषण और जनस्वास्थ्य सर्वेक्षण की मांग
पार्टी ने वाशरियों, ताप विद्युत संयंत्रों, रेलवे साइडिंग और भारी कोयला परिवहन से प्रभावित लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग की। इसमें वायु प्रदूषण, धूल, राख, शोर, भूजल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन शामिल करने की मांग की गई है।
पेसा, भूमि और ग्रामसभा के अभिलेखों की जांच
युवा मोर्चा प्रदेश संयोजक संजय रत्नाकर ने कहा कि कोरबा क्षेत्र में पेसा प्रावधानों के अंतर्गत आने वाली ग्रामसभाओं,वन एवं सामुदायिक भूमि तथा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग से जुड़े अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए। संगठन ने परियोजना विस्तार के दौरान ग्रामसभा की सहमति और संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं के पालन का सत्यापन कराने की मांग की। डीजल, बायोडीजल और सरकारी सुविधाओं की भी जांच पार्टी ने 1 जनवरी 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल, एचएसडी और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन एवं उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की। अन्य राज्यों से बायोडीजल मंगाकर उपयोग किए जाने संबंधी शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई।
कमल किशोर साव ने एसीबी समूह एवं संबंधित कंपनियों को वर्ष 2015 से वर्तमान तक मिले कर छूट, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क में छूट तथा अन्य सरकारी सुविधाओं का परीक्षण कराने की मांग की।
श्रमिकों की स्थिति की जांच की मांग
शैलेंद्र कुमार गोपाल ने वाशरी, परिवहन, रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत संयंत्रों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, दुर्घटना रिकॉर्ड और ठेका श्रम संबंधी नियमों के अनुपालन की जांच की मांग की।
विन्देश सिंह राठौर ने कहा कि जांच केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित एसईसीएल, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम, जल संसाधन सहित अन्य विभागों के अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण और कार्रवाई की भी समीक्षा होनी चाहिए।
डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
संगठन ने तौल कांटों के सर्वर,जीपीएस,फास्टैग,एएनपीआर, सीसीटीवी,आरएफआईडी,ओसीईएमएस/सीईएमएस, ईआरपी/एसएपी, ईंधन रिकॉर्ड, रेलवे रिकॉर्ड तथा वित्तीय डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने के निर्देश जारी करने की मांग की,ताकि जांच के दौरान रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
एसईसीएल की अन्य गतिविधियों की जांच की भी मांग
दीपक दुबे ने एसईसीएल की विभिन्न खदानों में वर्ष 2018 से वर्तमान तक सीएसआर कार्यों, खरीदी-बिक्री,सामग्री आपूर्ति,ओबी कार्यों के भुगतान तथा अन्य कार्यों की भी जांच कराने की मांग की।
धरना प्रदर्शन को इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनीश सेठ और आम आदमी पार्टी के सचिव डॉ. सुनील राज किरण ने समर्थन दिया। उन्होंने एसईसीएल से जुड़े भूविस्थापितों के मुआवजे एवं रोजगार के मुद्दों तथा कथित अनियमितताओं की जांच की मांग का समर्थन किया।
धरने में भारतीय जनाधिकार पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। इनमें शैलेंद्र कुमार गोपाल, विन्देश सिंह राठौर, कमल किशोर साव, दिनेश यादव, संजय रत्नाकर, हेमंत पैगवार, मो. असद खान, अशफाक खान, कृष्णा टंडन, होरी दास महंत, संजय सिंह, संतोष अनंत, संतोष यादव, हेमंत पटेल, जितेंद्र कुमार, आशीष तिवारी, मारुति कुमार, पप्पू सरदार, देवेंद्र सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। 2 अक्टूबर से आंदोलन तेज करने की चेतावनी दीपक दुबे ने कहा कि यदि सीबीआई/एसआईटी अथवा राज्य सरकार की ओर से जांच दल गठित कर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो 2 अक्टूबर को कोरबा कलेक्टर कार्यालय के सामने 24 घंटे का गांधीवादी न्याय आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद 22 अक्टूबर से एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने अनिश्चितकालीन धरना तथा 1 नवंबर को केंद्रीय कोयला मंत्री के आवास,हैदराबाद के सामने प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है। पार्टी ने कहा कि इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
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एसीबी समूह से जुड़े कोयला कारोबार की सीबीआई जांच की मांग,एसईसीएल मुख्यालय के सामने धरना
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सुहाना लाइव न्यूज बिलासपुर, 24 सितंबर 2026 भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ ने एसीबी समूह की कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन एवं
रेलवे साइडिंग से संबंधित गतिविधियों की वर्ष 1999 से वर्तमान तक जांच की मांग को लेकर गुरुवार को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से जांच संबंधी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
पार्टी के संयोजक एवं अध्यक्ष दीपक दुबे ने आरोप लगाया कि एसीबी समूह से संबंधित कोयला कारोबार में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही
हैं। उन्होंने कोयले की गुणवत्ता,उत्पादन, परिवहन, वाशरी में प्रसंस्करण तथा रिजेक्ट कोल के वास्तविक उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की। उन्होंने
कहा कि प्रत्येक वाशरी की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन का अभिलेखों से सत्यापन होना चाहिए।
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लिए सीबीआई जांच के साथ उच्चस्तरीय विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है। इसके अलावा वित्तीय एवं डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट, तकनीकी जांच तथा भौतिक सत्यापन
कराने की मांग रखी गई।
कोयले के स्रोत और उपयोग का हो सत्यापन
दुबे ने मांग की कि कच्चे कोयले से लेकर धुले कोयले, मध्यवर्ती उत्पाद, रिजेक्ट, गाद एवं सूक्ष्म कणों तक का वैज्ञानिक हिसाब तैयार किया जाए। परिवहन किए गए
कोयले के स्रोत, वाशरी, प्रसंस्करण, रिजेक्ट की मात्रा, परिवहन मार्ग, प्राप्तकर्ता और अंतिम उपयोग का रिकॉर्ड मिलाया जाए।
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उन्होंने पूर्व में एसीबी से संबंधित परिसरों में बड़ी मात्रा में कोयला पकड़े जाने का दावा करते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की। साथ ही कोल
लेवी से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की।
दीपका क्षेत्र में प्रदूषण और जनस्वास्थ्य सर्वेक्षण की मांग
पार्टी ने वाशरियों, ताप विद्युत संयंत्रों, रेलवे साइडिंग और भारी कोयला परिवहन से प्रभावित लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण
कराने की मांग की। इसमें वायु प्रदूषण, धूल, राख, शोर, भूजल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन शामिल करने की मांग की गई है।
पेसा, भूमि और ग्रामसभा के अभिलेखों की जांच
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परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग से जुड़े अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए। संगठन ने परियोजना विस्तार के दौरान ग्रामसभा की सहमति और संबंधित वैधानिक
प्रक्रियाओं के पालन का सत्यापन कराने की मांग की।
डीजल, बायोडीजल और सरकारी सुविधाओं की भी जांच
पार्टी ने 1 जनवरी 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल, एचएसडी और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन एवं उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की। अन्य राज्यों से
बायोडीजल मंगाकर उपयोग किए जाने संबंधी शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई।
कमल किशोर साव ने एसीबी समूह एवं संबंधित कंपनियों को वर्ष 2015 से वर्तमान तक मिले कर छूट, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क में छूट तथा अन्य सरकारी
सुविधाओं का परीक्षण कराने की मांग की।
श्रमिकों की स्थिति की जांच की मांग
शैलेंद्र कुमार गोपाल ने वाशरी, परिवहन, रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत संयंत्रों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण,
स्वास्थ्य परीक्षण, दुर्घटना रिकॉर्ड और ठेका श्रम संबंधी नियमों के अनुपालन की जांच की मांग की।
विन्देश सिंह राठौर ने कहा कि जांच केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित एसईसीएल, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम, जल संसाधन सहित अन्य विभागों
के अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण और कार्रवाई की भी समीक्षा होनी चाहिए।
डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
संगठन ने तौल कांटों के सर्वर,जीपीएस,फास्टैग,एएनपीआर, सीसीटीवी,आरएफआईडी,ओसीईएमएस/सीईएमएस, ईआरपी/एसएपी, ईंधन रिकॉर्ड, रेलवे रिकॉर्ड तथा वित्तीय डिजिटल
डेटा को सुरक्षित रखने के निर्देश जारी करने की मांग की,ताकि जांच के दौरान रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
एसईसीएल की अन्य गतिविधियों की जांच की भी मांग
दीपक दुबे ने एसईसीएल की विभिन्न खदानों में वर्ष 2018 से वर्तमान तक सीएसआर कार्यों, खरीदी-बिक्री,सामग्री आपूर्ति,ओबी कार्यों के भुगतान तथा अन्य कार्यों की
भी जांच कराने की मांग की।
धरना प्रदर्शन को इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनीश सेठ और आम आदमी पार्टी के सचिव डॉ. सुनील राज किरण ने समर्थन दिया। उन्होंने एसईसीएल से जुड़े
भूविस्थापितों के मुआवजे एवं रोजगार के मुद्दों तथा कथित अनियमितताओं की जांच की मांग का समर्थन किया।
धरने में भारतीय जनाधिकार पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। इनमें शैलेंद्र कुमार गोपाल, विन्देश सिंह राठौर, कमल किशोर साव,
दिनेश यादव, संजय रत्नाकर, हेमंत पैगवार, मो. असद खान, अशफाक खान, कृष्णा टंडन, होरी दास महंत, संजय सिंह, संतोष अनंत, संतोष यादव, हेमंत पटेल, जितेंद्र कुमार, आशीष
तिवारी, मारुति कुमार, पप्पू सरदार, देवेंद्र सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
2 अक्टूबर से आंदोलन तेज करने की चेतावनी
दीपक दुबे ने कहा कि यदि सीबीआई/एसआईटी अथवा राज्य सरकार की ओर से जांच दल गठित कर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो 2 अक्टूबर को कोरबा कलेक्टर कार्यालय के सामने 24
घंटे का गांधीवादी न्याय आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद 22 अक्टूबर से एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने अनिश्चितकालीन धरना तथा 1 नवंबर को केंद्रीय कोयला
मंत्री के आवास,हैदराबाद के सामने प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
पार्टी ने कहा कि इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
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