छत्तीसगढ़ देश का बिजली हब है,फिर भी इसी राज्य के ह्रदयस्थल जांजगीर-चांपा जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की अंधेरा जीवन:गावों की बिजली विडंबना।
17/07/2025 9:22 PM Total Views: 24958

छत्तीसगढ़ देश का”बिजली हब”है,फिर भी इसी राज्य के ह्रदयस्थल जांजगीर-चांपा जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की अंधेरा जीवन:गावों की बिजली विडंबना।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखंड अंतर्गत दर्जनों गांव बिजली की आंख मिचौली से परेशान है।हनुमान धारा सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति चांपा सहित ग्राम–कुरदा,अमझर, उच्चभिठ्ठी,कुधरी,मड़वा,घुठिया,लछनपुर, बसंतपुर,तेंदूभाठा,मदनपुरगढ़ आदि छेत्र–आज भी बिजली नामक आधुनिक सुविधा की दंश झेल रहे हैं।

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें
इस स्थिति की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ को देश का”बिजली हब”कहा जाता है। राज्य में अनेक विशाल ताप विद्युत संयंत्र स्थापित हैं जो न केवल देश के अन्य राज्यों बल्कि विदेशों तक को बिजली निर्यात करते हैं। फिर भी,इसी राज्य के हृदयस्थल,जांजगीर-चांपा जैसे जिले के ग्रामीण अंचलों में,जहां से यह बिजली उत्पन्न होती है या उसके निकट है,वहां के निवासी बुनियादी,निर्बाध विद्युत आपूर्ति से वंचित हैं। यह विकास का एक कटु सत्य है। बिजली की आंखमिचौली”का सिलसिला डिस्को डांस की तरह डेकोरेट होता रहता है 24 घंटे में हर दिन दर्जनो से अधिक बार बंद चालू होता है। हल्की बारिश हुई या मामूली हवाएं चलने से ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली कई घंटों तक बंद रहते हैं। कभी-कभी तो अधिकांश रात्रि के लिए,गांवों को अंधेरे के गर्त में धकेल दिया जाता है। चांपा हनुमानधारा स्थित सब-स्टेशन से होने वाली यह आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्रों के जनजीवन के लिए गंभीर संकट बन गई है।
Read Also This:

ग्रामीणों के लिए बिजली कटौती सिर्फ असुविधा नहीं,बल्कि एक निरंतर यातना है। रोजमर्रा के काम–बच्चों की पढ़ाई,घरेलूकार्य,छोटे उद्योग चलाना–सब अस्त-व्यस्त हो जाते हैं।मोबाइल फोन जैसी आधुनिक जरूरतें बिना चार्ज के बेकार पड़ी रहती हैं। किसानों के लिए सिंचाई पंप बंद होना फसलों के लिए खतरा बन जाता है। यह अघोषित,अनियोजित और अक्सर लंबे समय तक चलने वाली कटौती ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ शिक्षा पर प्रहार करती है।

*ग्रामीण क्षेत्रों में इंशानों की सुरक्षा का संकट*बारिश के मौसम में यह समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। अंधेरा होते ही घरों में सांप,बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़े घुस आते हैं। यह कोई काल्पनिक भय नहीं,बल्कि एक कड़वी हकीकत है जिसका सामना इन गांवों के निवासी प्रायः करते हैं। अंधेरे में इन जहरीले जीवों के काटने का खतरा हर पल मंडराता रहता है,जिससे न केवल स्वास्थ्य बल्कि जान तक को गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। रात्रि में आवागमन भी दुर्घटनाओं को निमंत्रण देता है।
**समस्या के मूल कारण:**इस स्थिति के पीछे कई कारण जिम्मेदार प्रतीत होते हैं:
(1.)पुराना और कमजोर वितरण नेटवर्क: चांपा हनुमानधारा सब-स्टेशन से निकलने वाली वितरण लाइनें पुरानी,जर्जर और अपर्याप्त हैं। हल्की बारिश या हवा से तारों का टूटना,ट्रांसफार्मर फेल होना या शॉर्ट सर्किट होना आम बात है।
(2.)अपर्याप्त रखरखाव:*बिजली वितरण कंपनियों द्वारा नियमित और प्रभावी रखरखाव का अभाव है। पेड़ों की छंटाई,खंभों की मरम्मत और उपकरणों का आधुनिकीकरण नहीं हो पा रहा।
(3.)बढ़ता भार और असंतुलन:*गांवों में बिजली की मांग बढ़ रही है,लेकिन बुनियादी ढांचा उस भार को वहन करने में अक्षम है,जिससे अधिभार (ओवरलोड) की स्थिति बनती है।
(4.)प्रतिक्रिया में देरी:*बिजली गुल होने पर मरम्मत दलों की प्रतिक्रिया धीमी होती है,जिससे कटौती का समय लंबा खिंच जाता है।
ग्रामीणों की मांग और आशा:-इन गांवों की जनता की मांग स्पष्ट और जायज है:
बुनियादी ढांचे का तत्काल सुदृढ़ीकरण:पुराने तारों,ट्रांसफॉर्मरों और खंभों का जल्द से जल्द आधुनिकीकरण और प्रतिस्थापन।
नियमित और पारदर्शी रखरखाव:-वितरण नेटवर्क का नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव सुनिश्चित करना।
त्वरित बहाली सेवा:-बिजली गुल होने पर मरम्मत दलों की त्वरित उपलब्धता और कार्रवाई।
पारदर्शिता:-बिजली कटौती के कारणों और अनुमानित बहाली समय के बारे में ग्रामीणों को सूचित करना।
दीर्घकालिक योजना:-भविष्य की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए वितरण क्षमता बढ़ाने की योजना बनाना और लागू करना।
चांपा सहित कुरदा और आसपास के गांवों की यह स्थिति छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा पर एक गहरा प्रश्नचिह्न है.? यह सिर्फ बिजली की कमी नहीं,बल्कि मूलभूत सुविधाओं,सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की कमी को उजागर कर रहा है। जिस राज्य से देश और विदेश को बिजली निर्यात होती है,वहां के अपने ग्रामीण अंधेरे में जीवन जीने को अभिशप्त नहीं हो सकते। यह आवश्यक है कि राज्य सरकार,विद्युत वितरण कंपनियां और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान दें। गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने,रखरखाव सुनिश्चित करने और एक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रणाली स्थापित करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।ग्रामीणों की सुरक्षा और उनके विकास का अधिकार इसकी मांग करता है।”बिजली हब” का यह अंधेरा पक्ष अब बदलना ही होगा।।

News–suhanalivenews.com…
S. MATHUR…..
Mo. 6263113057
खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
जो करता है एक लोकतंत्र का निर्माण।
यह है वह वस्तु जो लोकतंत्र को जीवन देती नवीन
छत्तीसगढ़ देश का बिजली हब है,फिर भी इसी राज्य के ह्रदयस्थल जांजगीर-चांपा जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की अंधेरा जीवन:गावों की बिजली विडंबना।
Website Design By Bootalpha.com +91 84482 65129





