अंधेरा रेल्वे ओव्हरब्रिज की बंद स्ट्रीट लाईटें औऱ जानलेवा खामोशी।।
17/06/20258:39 PMTotal Views: 24949
चांपा के अंधेरा रेल्वे ओवरब्रिज की बंद स्ट्रीट लाइटें और जानलेवा खामोशी:..? छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा जिला अपनी खनिज सम्पदा और कृषि क्षमता के अलावा चांपा कोसा कांसा कंचन की नगरी के लिए जाना जाता है,लेकिन पिछले कई वर्षों से यहां के चांपा स्थित ओवरब्रिज की कहानी सुर्खियों में बनी हुई है।वायआकार की यह ओवरब्रिज जिसका निर्माण स्वयं विवादों के घेरे में रहा,अब एकबार फिर से नए और गंभीर संकट का केंद्र बनता जा रहा है,क्योकि सालों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाईटें की अंधेरा,सिर्फ राहगीरों के लिए खतरा नही है बल्कि हर उस मुसाफ़िर के लिए आफ़त बनता जा रहा है जो इस ब्रिज से आवागमन करते हैं। क्योंकि इन्ही में से कइयों की जानें जा चुकी हैं,और अनेक परिवार शोक के सागर में डूब गए हैं।
कोरबा और बिर्रा दोनों तरफ़ की स्ट्रीट लाइटें पुर्ण बंद।।
बंद पड़े स्ट्रीट लाइट को शीघ्र-अतिशीघ्र रौशन किया जाए।यदि रौशनी की सागर जल जाता है तो ओवरब्रिज पर जलती हुई रोशनी केवल रास्ता ही नहीं दिखाएगी बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता के अंधेरे को चीरने और जनजीवन की सुरक्षा के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बनेगी। जनता की गुहार को अनसुना करना बंद होना चाहिए क्योंकि हर अनसुनी गुहार किसी न किसी की जिंदगी से जुड़ी है। अंधेरे में खो चुकी जानों की याद में,आने वाले जीवनों की रक्षा के लिए अब कार्रवाई का समय आ गया है। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने से यह समस्या जन-असहमति और क्रोध का रूप ले चुकी है। चांपा रेल्वे ओवरब्रिज का इतिहास स्वच्छ नहीं रहा। इसके निर्माण को लेकर शुरू से ही गंभीर आरोप और विवाद सामने आते रहे। निर्माण कार्य की गुणवत्ता,लागत में अनियमितताएं और ठेकेदारों एवं अधिकारियों के बीच गलत समझौतों के आरोपों ने इस ढांचे पर सवालियानिशान लगा दिया है।। कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने इसकी जांच की मांग भी उठाई थी।ब्रिज की बुनियादी सुविधाओं,को लेकर नगर के लोग बड़ी संख्या में बैगर राजनीतिक दल के।(हमर चांपा के बैनर तले) रेल्वे स्टेशन में धरना प्रदर्शन कर ठेकेदार और रेल्वे प्रशासन की उदासीनता को लेकर रेल्वे परिसर में नगाड़ा बजाकर कुंभकर्णीय नींद में सोए हुए जिम्मेदार आला अधिकारियों को जगाने की काम की था। तब जाकर ब्रिज निर्माण कार्य में तेजी आई थी।लेकिन स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम की घोर उपेक्षा हुई।निर्माण के बाद से ही या फिर बहुत कम समय बाद ही ये लाइटें खराब हो गईं और फिर कभी ठीक नहीं की गईं।
(अंधेरा का काला साया जानलेवा परिणाम) ब्रिज से गुजर कर चांपा नगर आगमन तक रेल्वे कालोनी की स्ट्रीट लाइट बंद पड़े हैं देखिए वीडियों में।
अंधेरे का काला साया: जानलेवा परिणाम।
ओवरब्रिज पर स्ट्रीट लाइटों का बंद रहना कोई छोटी सी असुविधा नहीं है; यह एक गंभीर जनसुरक्षा संकट है।बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों के कारण,रात्रिकालीन अँधकार में इस वायआकार की ओवरब्रिज खतरनाक मोड़ सा लगता है। जो वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए मौत का सफर बन सकता है। दुर्घटनाओं का दुखद सिलसिला:स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण वाहनों के बीच टक्कर,वाहनों का ओवरब्रिज की दीवारों से टकराना या गलत दिशा में मुड़ जाने जैसी घटनाएं होने से इनकार नहीं किया जा सकता हैं। स्थानीय निवासी और एम्बुलेंस चालक कई घातक और गंभीर चोटों वाली दुर्घटनाओं तथा अकारण मृत्यु की पुष्टि करते हैं,जो सीधे तौर पर इस अंधेरे से जुड़ी हैं। निर्दोष लोगो की जान चले जाना सबसे दर्दनाक पहलू है इस उपेक्षा की कीमत मासूम लोगों की जान से चुकाई जा रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इस ओवरब्रिज पर अंधेरे के कारण हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की अकारण मौत हो चुकी है। हर एक मौत किसी ना किसी की परिवार को तोड़ देती है जो प्रशासनिक लापरवाही पर एक काला धब्बा है।
पैदल यात्रियों के लिए जोखिम,ओवरब्रिज का इस्तेमाल पैदल यात्री भी करते हैं।बिना रोशनी के फुटपाथ का पता लगाना मुश्किल होता है,और वाहनों से टकराने या गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।महिलाओं और बुजुर्गों के लिए तो यह रास्ता विशेष रूप से भयावह है।
स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इस जानलेवा समस्या के प्रति सजग हैं और लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने इस खतरनाक स्थिति की जानकारी हर संभव स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया है:
प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायतें: तहसीलदार,कलेक्टर कार्यालय और पुलिस प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गई हैं,जिनमें दुर्घटनाओं के विवरण और तत्काल कार्रवाई की मांग शामिल है। प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों की पूर्ण उदासीनता तथा खामोशी ही दिखाई देती है। शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई ना ही लाइटों की मरम्मत का काम शुरू हुआ है। यह लगातार अनदेखी एक स्पष्ट संदेश देती है कि आम जनता की सुरक्षा और जीवन उनकी प्राथमिकता सूची में नहीं हैं।
क्यों जारी है यह खामोशी जांच की जरूरत.?
यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर इतनी स्पष्ट और जानलेवा समस्या को दूर करने में इतनी देरी क्यों.? पूछ रहा है जनता संभावित कारणों पर विचार कर जल्द से जल्द ब्रिज की बंद स्ट्रीट लाइटों को सुचारू रूप से चालू किया जाए।।
News suhanalive.com
S.MATHUR
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अंधेरा रेल्वे ओव्हरब्रिज की बंद स्ट्रीट लाईटें औऱ जानलेवा खामोशी।।
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चांपा के अंधेरा रेल्वे ओवरब्रिज की बंद स्ट्रीट लाइटें और जानलेवा खामोशी:..?
छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा जिला अपनी खनिज सम्पदा और कृषि क्षमता के अलावा चांपा कोसा कांसा कंचन की नगरी के लिए जाना जाता है,लेकिन पिछले कई वर्षों से यहां
के चांपा स्थित ओवरब्रिज की कहानी सुर्खियों में बनी हुई है।वायआकार की यह ओवरब्रिज जिसका निर्माण स्वयं विवादों के घेरे में रहा,अब एकबार फिर से नए और गंभीर
संकट का केंद्र बनता जा रहा है,क्योकि सालों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाईटें की अंधेरा,सिर्फ राहगीरों के लिए खतरा नही है बल्कि हर उस मुसाफ़िर के लिए आफ़त बनता जा
रहा है जो इस ब्रिज से आवागमन करते हैं। क्योंकि इन्ही में से कइयों की जानें जा चुकी हैं,और अनेक परिवार शोक के सागर में डूब गए हैं।
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कोरबा और बिर्रा दोनों तरफ़ की स्ट्रीट लाइटें पुर्ण बंद।।
बंद पड़े स्ट्रीट लाइट को शीघ्र-अतिशीघ्र रौशन किया जाए।यदि रौशनी की सागर जल जाता है तो ओवरब्रिज पर जलती हुई रोशनी केवल रास्ता ही नहीं दिखाएगी बल्कि यह
प्रशासनिक उदासीनता के अंधेरे को चीरने और जनजीवन की सुरक्षा के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बनेगी। जनता की गुहार को अनसुना करना बंद होना
चाहिए क्योंकि हर अनसुनी गुहार किसी न किसी की जिंदगी से जुड़ी है। अंधेरे में खो चुकी जानों की याद में,आने वाले जीवनों की रक्षा के लिए अब कार्रवाई का समय आ
गया है। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने से यह समस्या जन-असहमति और क्रोध का रूप ले चुकी है।
चांपा रेल्वे ओवरब्रिज का इतिहास स्वच्छ नहीं रहा। इसके निर्माण को लेकर शुरू से ही गंभीर आरोप और विवाद सामने आते रहे। निर्माण कार्य की गुणवत्ता,लागत में
अनियमितताएं और ठेकेदारों एवं अधिकारियों के बीच गलत समझौतों के आरोपों ने इस ढांचे पर सवालिया निशान लगा दिया है।। कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों
ने इसकी जांच की मांग भी उठाई थी।ब्रिज की बुनियादी सुविधाओं,को लेकर नगर के लोग बड़ी संख्या में बैगर राजनीतिक दल के।(हमर चांपा के बैनर तले) रेल्वे स्टेशन
में धरना प्रदर्शन कर ठेकेदार और रेल्वे प्रशासन की उदासीनता को लेकर रेल्वे परिसर में नगाड़ा बजाकर कुंभकर्णीय नींद में सोए हुए जिम्मेदार आला अधिकारियों
को जगाने की काम की था। तब जाकर ब्रिज निर्माण कार्य में तेजी आई थी।लेकिन स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम की घोर उपेक्षा हुई।निर्माण के बाद से ही या फिर बहुत कम समय
बाद ही ये लाइटें खराब हो गईं और फिर कभी ठीक नहीं की गईं।
(अंधेरा का काला साया जानलेवा परिणाम) ब्रिज से गुजर कर चांपा नगर आगमन तक रेल्वे कालोनी की स्ट्रीट लाइट बंद पड़े हैं देखिए वीडियों में।
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अंधेरे का काला साया: जानलेवा परिणाम।
ओवरब्रिज पर स्ट्रीट लाइटों का बंद रहना कोई छोटी सी असुविधा नहीं है; यह एक गंभीर जनसुरक्षा संकट है।बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों के कारण,रात्रिकालीन अँधकार
में इस वायआकार की ओवरब्रिज खतरनाक मोड़ सा लगता है। जो वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए मौत का सफर बन सकता है।
दुर्घटनाओं का दुखद सिलसिला:स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण वाहनों के बीच टक्कर,वाहनों का ओवरब्रिज की दीवारों से टकराना या गलत दिशा में मुड़ जाने जैसी
घटनाएं होने से इनकार नहीं किया जा सकता हैं। स्थानीय निवासी और एम्बुलेंस चालक कई घातक और गंभीर चोटों वाली दुर्घटनाओं तथा अकारण मृत्यु की पुष्टि करते
हैं,जो सीधे तौर पर इस अंधेरे से जुड़ी हैं।
निर्दोष लोगो की जान चले जाना सबसे दर्दनाक पहलू है इस उपेक्षा की कीमत मासूम लोगों की जान से चुकाई जा रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में
इस ओवरब्रिज पर अंधेरे के कारण हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की अकारण मौत हो चुकी है। हर एक मौत किसी ना किसी की परिवार को तोड़ देती है जो प्रशासनिक लापरवाही
पर एक काला धब्बा है।
पैदल यात्रियों के लिए जोखिम,ओवरब्रिज का इस्तेमाल पैदल यात्री भी करते हैं।बिना रोशनी के फुटपाथ का पता लगाना मुश्किल होता है,और वाहनों से टकराने या गिरने
का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।महिलाओं और बुजुर्गों के लिए तो यह रास्ता विशेष रूप से भयावह है।
स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इस जानलेवा समस्या के प्रति सजग हैं और लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने इस खतरनाक स्थिति की जानकारी हर संभव स्तर
पर पहुंचाने का प्रयास किया है:
प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायतें: तहसीलदार,कलेक्टर कार्यालय और पुलिस प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गई हैं,जिनमें दुर्घटनाओं के विवरण और
तत्काल कार्रवाई की मांग शामिल है। प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों की पूर्ण उदासीनता तथा खामोशी ही दिखाई देती है। शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं
हुई ना ही लाइटों की मरम्मत का काम शुरू हुआ है। यह लगातार अनदेखी एक स्पष्ट संदेश देती है कि आम जनता की सुरक्षा और जीवन उनकी प्राथमिकता सूची में नहीं हैं।
क्यों जारी है यह खामोशी जांच की जरूरत.?
यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर इतनी स्पष्ट और जानलेवा समस्या को दूर करने में इतनी देरी क्यों.? पूछ रहा है जनता संभावित कारणों पर विचार कर जल्द से जल्द ब्रिज
की बंद स्ट्रीट लाइटों को सुचारू रूप से चालू किया जाए।।
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