चांपा। चांपा तहसील परिसर में कुछ साल पहले बने सुलभ शौचालय की हालत देखरेख के अभाव में जर्जर हो गई है। गंदगी और पानी की उचित व्यवस्था न होने के कारण यहां आने वाले पक्षकारों और वकीलों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर अधिवक्ताओं ने नगर प्रशासन से शौचालय की सफाई और पानी की व्यवस्था कराने की मांग की है।शौचालय की हालत बेहद खराब तहसील परिसर में बना सुलभ शौचालय पूरी तरह से उपेक्षित है। शौचालय में साफ-सफाई का कोई प्रबंध नहीं है, जिससे गंदगी फैली हुई है। पानी की व्यवस्था न होने के कारण शौचालय का उपयोग करना मुश्किल हो गया है। इसकी वजह से तहसील परिसर में आने वाले लोगों, खासकर महिलाओं और वकीलों को बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ता

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अधिवक्ताओं ने उठाई आवाज इस समस्या को लेकर अधिवक्ता महावीर सोनी, भीमन थवाईत, गणेश श्रीवास, संजय सोयेत्रा, दीपक बरेठ, लक्ष्मी बंजारे, विजय पटेल, शालिनी सोनी सहित कई अन्य वकीलों ने नगर प्रशासन के समक्ष मांग रखी है कि तहसील परिसर में स्थित सुलभ शौचालय की साफ-सफाई और पानी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को दिक्कत न हो। उन्होंने बताया कि शौचालय की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग इसका उपयोग करने से कतराते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वच्छता भी प्रभावित हो रही है। प्रशासन की उदासीनता बनी समस्या स्थानीय निवासियों और वकीलों का कहना है कि यह समस्या काफी समय से चली आ रही है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। शौचालय की उचित देखभाल न होने से न केवल सुविधा बर्बाद हो रही है, बल्कि लोगों को असुविधा भी झेलनी पड़ रही है। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आगे भी आवाज उठाते रहेंगे। [video width="1280" height="720" mp4="http://suhanalivenews.com/wp-content/uploads/2025/05/video_20250527_132717.mp4"][/video]   नगर प्रशासन से मांग अधिवक्ताओं ने नगर प्रशासन से निम्न मांगें रखी हैं: 1. तहसील परिसर में स्थित सुलभ शौचालय की तुरंत साफ-सफाई की जाए। 2. शौचालय में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। 3. शौचालय के रखरखाव के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। 4. समय-समय पर स्वच्छता अभियान चलाकर शौचालय को साफ रखा जाए। निष्कर्ष चांपा तहसील परिसर में सुलभ शौचालय की दुर्दशा नगर प्रशासन की उपेक्षा को उजागर करती है। यह सुविधा जनता के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब यह बोझ बन गई है। अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि नगर प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कितनी जल्दी इसका समाधान करता है।